हमारे लिए

हाथ जोड़े हुए, झुर्रियाँ कह रहीं, कुछ समय तो निकालो हमारे लिए। बात ख़ुद से करूँ, तुम कहो कब तलक, लाख सपने मगर, कब झपकती पलक, सूख...